जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (उत्तर–पूर्व जिला)
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का उत्तर-पूर्व जिला यमुना नदी के बाढ़ मैदान के किनारे स्थित है, जिसके कारण यह जिला अन्य कई जिलों की तुलना में बाढ़ एवं भूकंप के प्रति अधिक संवेदनशील है। इस जिले में उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब आदि विभिन्न राज्यों से आए प्रवासी जनसंख्या की संख्या अधिक है, जिसके परिणामस्वरूप घनी आबादी वाली पुनर्वास कॉलोनियाँ, झुग्गी-झोपड़ी बस्तियाँ तथा औद्योगिक क्षेत्र विकसित हुए हैं। इनमें से अनेक क्षेत्रों में आवागमन के लिए संकरी गलियाँ हैं।
भारत के नवीनतम भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र के अनुसार दिल्ली भूकंपीय क्षेत्र-IV में आती है, जो भूकंप के प्रति उच्च संवेदनशीलता को दर्शाता है। अतः जिला बाढ़, भूकंप, अग्नि दुर्घटनाएँ, भवन ध्वस्त होने जैसी अनेक आपदाओं के जोखिम से प्रभावित है।
आपदाएँ सतत विकास के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती हैं, क्योंकि इनके कारण जनहानि, संपत्ति की क्षति, आवश्यक सेवाओं में बाधा तथा आर्थिक नुकसान होता है। इसके अतिरिक्त, आपदाएँ सामाजिक संरचनाओं को अस्थिर करती हैं और सीमित संसाधनों को आपातकालीन प्रतिक्रिया एवं पुनर्वास कार्यों की ओर मोड़ देती हैं।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), उत्तर-पूर्व जिला को नियमित रूप से अग्नि दुर्घटनाओं, भवन ध्वस्तीकरण, बाढ़ तथा अन्य आपदा-सदृश स्थितियों से संबंधित आपातकालीन कॉल प्राप्त होती हैं। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 30(xiii) के अंतर्गत जिला प्राधिकरण को आपदा निवारण, तैयारी एवं शमन हेतु सामुदायिक प्रशिक्षण तथा जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का दायित्व सौंपा गया है।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, उत्तर–पूर्व जिला की संगठनात्मक संरचना
डी डी एम ए, उत्तर–पूर्व जिला की संरचना
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में निम्नलिखित सदस्य शामिल होते हैं:
- जिला मजिस्ट्रेट, उत्तर-पूर्व जिला – अध्यक्ष (पदेन)
- निर्वाचित जनप्रतिनिधि (विधायक / नगर पार्षद) – सह-अध्यक्ष (पदेन), माननीय उपराज्यपाल द्वारा नामित
- अपर जिला मजिस्ट्रेट (उत्तर-पूर्व) – सदस्य एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (पदेन)
- पुलिस उपायुक्त, उत्तर-पूर्व जिला – सदस्य (पदेन)
- अंचल उपायुक्त, नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) – सदस्य (पदेन)
- मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) – सदस्य (पदेन)
- अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) – सदस्य (पदेन)
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण – विधिक ढांचा
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की स्थापना भारत की संसद द्वारा अधिनियमित आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 25 के अंतर्गत की गई है। इस प्राधिकरण को माननीय उपराज्यपाल, दिल्ली द्वारा अधिसूचना संख्या F. DRM/ADM(HQ)/DM/Rules/2006(i) के माध्यम से अधिसूचित किया गया है।
डीडीएमए, उत्तर-पूर्व जिला, जिले में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिक्रिया एवं शमन से संबंधित गतिविधियों के लिए सर्वोच्च योजना एवं समन्वय निकाय के रूप में कार्य करता है।
अध्यक्ष की शक्तियाँ एवं कार्य
जिला प्राधिकरण के अध्यक्ष, बैठकों की अध्यक्षता करने के अतिरिक्त, जिला प्राधिकरण द्वारा सौंपे गए सभी अधिकारों एवं कर्तव्यों का प्रयोग एवं निर्वहन करते हैं।
आपात स्थिति में अध्यक्ष को जिला प्राधिकरण की सभी या किसी भी शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार होता है, जो बाद में प्राधिकरण द्वारा अनुमोदन (Ex-post facto ratification) के अधीन होगा। जिला प्राधिकरण या अध्यक्ष सामान्य अथवा विशेष लिखित आदेश द्वारा, निर्धारित शर्तों एवं सीमाओं के अंतर्गत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अधिकार एवं कार्य सौंप सकते हैं।
संस्थागत तंत्र एवं कार्य
(आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अनुसार)
राष्ट्रीय स्तर का तंत्र
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए)
[आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 3 के अंतर्गत गठित]
राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन गतिविधियों के प्रभावी समन्वय हेतु आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 3 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) का गठन किया गया है। एनडीएमए भारत में आपदा प्रबंधन की सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था है तथा यह माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कार्य करता है।
एनडीएमए एक बहु-विषयक प्राधिकरण है, जिसमें संबंधित मंत्रालयों, विभागों एवं संगठनों के सदस्य शामिल होते हैं, और जो आपदा प्रबंधन के लिए नीतियाँ, योजनाएँ एवं दिशानिर्देश निर्धारित करता है।
भारत सरकार द्वारा नोडल मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रीय आकस्मिक कार्ययोजना (National Contingency Action Plan) भी तैयार की गई है। इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकालीन परिचालन केंद्र (एनईओसी) कार्यरत है, जो आधुनिक संचार प्रणालियों एवं तकनीकों से सुसज्जित है, ताकि आपदाओं के दौरान प्रभावी समन्वय एवं प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
राज्य स्तर का तंत्र
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डी डी एम ए)
[आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 14 के अंतर्गत गठित]
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 14 के अंतर्गत की गई है। यह माननीय उपराज्यपाल, दिल्ली की अध्यक्षता में कार्य करता है, जिसमें माननीय मुख्यमंत्री दिल्ली उपाध्यक्ष होते हैं तथा संबंधित विभागों के मंत्री सदस्य होते हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए राजस्व विभाग को आपदा प्रबंधन का नोडल विभाग नामित किया गया है, जिसमें संभागीय आयुक्त नोडल अधिकारी एवं डीडीएमए के संयोजक के रूप में कार्य करते हैं।
जिला स्तर का तंत्र
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डी डी एम ए), उत्तर–पूर्व जिला
[आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 25 के अंतर्गत गठित]
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), उत्तर-पूर्व जिला का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 25 के अंतर्गत किया गया है। यह प्राधिकरण जिला मजिस्ट्रेट, उत्तर-पूर्व जिला की अध्यक्षता में कार्य करता है, जो इसके अध्यक्ष (पदेन) होते हैं।
जिले के एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि (विधानसभा सदस्य / नगर पार्षद) सह-अध्यक्ष (पदेन) के रूप में कार्य करते हैं। अपर जिला मजिस्ट्रेट (उत्तर-पूर्व) इस प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) होते हैं।
डीडीएमए के सदस्यों में दिल्ली पुलिस, नगर निगम दिल्ली (एमसीडी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) तथा स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, जिससे आपदा तैयारी, प्रतिक्रिया एवं शमन हेतु प्रभावी अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित किया जाता है।